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मनुष्य को अपने जीवन काल में कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है : कथा व्यास टिंकू महाराज

कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है : टिंकू महाराज
गुरसराय/कोटरा। ग्राम बिलाटी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस पर बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध भागवताचार्य शास्त्री कृष्ण बिहारी तिवारी ‘टिंकू महाराज’ ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। कथा के दौरान उन्होंने धुंधकारी उद्धार, महाभारत प्रसंग तथा राजा परीक्षित के जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया।
कथावाचन करते हुए टिंकू महाराज ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य भोगना पड़ता है, चाहे उसमें कितना भी समय क्यों न लग जाए। उन्होंने धृतराष्ट्र के जीवन का उदाहरण देते हुए बताया कि पूर्व जन्म के कर्मों के कारण उन्हें अपने सौ पुत्रों की मृत्यु का दुख सहना पड़ा। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सदैव अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि कर्मों का फल किसी न किसी रूप में अवश्य प्राप्त होता है।
कथावाचक ने कहा कि भगवान श्रीराम भी अपने पिता की मृत्यु को नहीं रोक पाए और भगवान श्रीकृष्ण भी अपने वंश के विनाश को नहीं टाल सके। इससे स्पष्ट होता है कि कर्म और उसका फल जीवन का अटल सत्य है।
कथा में संगीत सहयोग फौजी यादव, हरनारायण एवं सुनील उरई ने दिया। वहीं अमित महाराज कोटरा तथा अरविंद शास्त्री सगौली ने श्रीमद्भागवत महापुराण का पूजन एवं पाठ संपन्न कराया। कथा के समापन पर श्रीमती मीरा देवी एवं तुलसीराम साहू ने श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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