श्री भरत के आदर्श चरित्र और भ्रातृ प्रेम का वर्णन किया।
मोंठ= निकटवर्ती ग्राम छपार में बीर हरदौल के स्थान पर चल रही श्रीराम कथा एवं 11 कुंडीय विष्णु महायज्ञ में रविवार को कथा व्यास साध्वी ज्योति शास्त्री ने भगवान श्रीराम के अनुज श्री भरत जी के आदर्श चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्री भरत की निष्काम भक्ति, त्याग, समर्पण और भ्रातृ प्रेम को मानव जीवन के लिए अनुकरणीय बताया। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
साध्वी ने कहा कि श्री भरत जी भारतीय संस्कृति में आदर्श भाई, आदर्श भक्त और आदर्श शासक के रूप में पूजनीय हैं। उन्होंने अयोध्या का राजसिंहासन स्वीकार करने के बजाय भगवान श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित किया और स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी जीवन व्यतीत किया। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची भक्ति में त्याग, समर्पण और मर्यादा का विशेष महत्व होता है।
कथा के दौरान उन्होंने श्रीराम और भरत के बीच अटूट प्रेम का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि भाई के प्रति भाई का ऐसा प्रेम संसार के लिए प्रेरणास्रोत है। श्री भरत जी ने अपने बड़े भाई के प्रति निष्ठा, सम्मान और समर्पण की जो मिसाल प्रस्तुत की, वह आज भी प्रत्येक परिवार के लिए आदर्श है।
इस अवसर पर यज्ञाचार्य सतीश चंद्र शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ में आहुतियां डलवाईं। कथा के अंत में श्रद्धालुओं ने आरती में भाग लेकर सुख-समृद्धि की कामना की। कथा स्थल पर पहुंचकर पूर्व विधायक बृजेंद्र व्यास ने कथा व्यास को सम्मानित कर उनका आशीर्वाद लिया।
कथा व्यास ने बताया कि कथा समापन के उपरांत आगामी 19 मई को 2 कन्याओं के सामूहिक विवाह भी सम्पन्न होंगे। कन्यादान के लिए अधिक से अधिक लोग शामिल हो।
