झांसी, 01 जून 2026।
आपदा प्रबंधन कार्यों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को कलेक्ट्रेट झांसी के नवीन सभागार में मण्डलीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता मण्डलायुक्त विमल कुमार दुबे ने की। कार्यशाला में अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) झांसी पल्लवी मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (वि./रा.) जालौन राजीव राज, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे ललितपुर संजय मिश्रा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी राजकिशोर राय सहित समस्त उपजिलाधिकारी, तहसीलदार एवं नोडल अधिकारी (बाढ़) झांसी तथा झांसी, जालौन और ललितपुर के विभिन्न अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण सत्र में आपदा विशेषज्ञ धीरज पाठक, रेडियो निरीक्षक शैलेन्द्र कुमार तथा 114 इंजीनियरिंग रेजीमेंट के नायब सूबेदार फरादे विठल ने हैम रेडियो के तकनीकी एवं व्यवहारिक उपयोग पर प्रकाश डाला। विशेषज्ञों ने बताया कि हैम रेडियो, जिसे एमेच्योर रेडियो भी कहा जाता है, एक गैर-व्यावसायिक दो-तरफा संचार प्रणाली है, जिसके माध्यम से बिना इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क के रेडियो तरंगों द्वारा देश-विदेश तक संपर्क स्थापित किया जा सकता है। यह सेवा लाइसेंस आधारित होती है और विशेष रूप से आपदा के समय अत्यंत उपयोगी सिद्ध होती है। कार्यशाला में बताया गया कि भूकंप, बाढ़ और तूफान जैसी आपदाओं के दौरान जब संचार के अन्य माध्यम बाधित हो जाते हैं, तब हैम रेडियो राहत एवं बचाव कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके माध्यम से स्थानीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक संपर्क संभव है, यहां तक कि अंतरिक्ष स्टेशन और उपग्रहों से भी संवाद स्थापित किया जा सकता है। भारत में वर्ष 2001 के भुज भूकंप, 2004 की हिंद महासागर सुनामी तथा 2013 की उत्तराखंड आपदा के दौरान हैम रेडियो का प्रभावी उपयोग किया जा चुका है। यह भी बताया गया कि हैम रेडियो संचालन के लिए भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत WPC विंग द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण कर लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। न्यूनतम 12 वर्ष आयु का कोई भी नागरिक इस परीक्षा में शामिल हो सकता है। परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ऑपरेटर को एक विशिष्ट कॉल साइन प्रदान किया जाता है। अधिकारियों ने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में भी हैम रेडियो की प्रासंगिकता बनी हुई है, क्योंकि यह किसी भी आधारभूत संचार ढांचे पर निर्भर नहीं करता और आपदा के समय विश्वसनीय माध्यम के रूप में कार्य करता है।
