श्रीमद्भागवत कथा में सती चरित्र, ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र का हुआ भावपूर्ण वर्णन।
मोंठ = मोंठ के ग्राम जौरा स्थित शिव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ एवं अमृत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंडित प्रभुदयाल शास्त्री (दतिया) ने सती चरित्र, ध्रुव चरित्र और भक्त प्रह्लाद की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए।
कथा व्यास ने सती चरित्र के माध्यम से बताया कि अहंकार और अपमान का परिणाम सदैव दुखद होता है। भगवान शिव और माता सती के प्रसंग से उन्होंने पारिवारिक सम्मान, संयम और श्रद्धा का संदेश दिया। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि दृढ़ संकल्प, तपस्या और अटूट भक्ति से बालक ध्रुव ने भगवान विष्णु को प्रसन्न कर ध्रुवपद प्राप्त किया। यह कथा बच्चों और युवाओं को लक्ष्य के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास की प्रेरणा देती है।
भक्त प्रह्लाद के प्रसंग में उन्होंने कहा कि सच्चे भक्त की रक्षा स्वयं भगवान करते हैं। विपरीत परिस्थितियों में भी जिसने भगवान का नाम नहीं छोड़ा, उसे अंततः विजय और ईश्वर की कृपा प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि भक्ति, धैर्य और विश्वास से जीवन की कठिनाइयों पर विजय पाई जा सकती है।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन कर भगवान के जयकारे लगाए। मुख्य यजमान श्रीमती अभिलाषा पत्नी छबिराम मुदगिल ने आरती की। इस मौके पर महेश मुदगिल, संतोष, चंद्रप्रकाश, सुनील, विनोद, श्री राम, बबलू, कमलेश यादव, विकास यादव, चतुर सिंह यादव, नरेश पुजारी, सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
