लखनऊ, 02 मई 2026।
जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तर प्रदेश की निदेशक एवं मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी शीतल वर्मा ने लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में ‘जनगणना 2027’ की तैयारियों और प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान एकत्र की गई सभी व्यक्तिगत जानकारी पूर्णतः गोपनीय रहेगी और इसका उपयोग किसी भी जांच या साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 का कार्य दो चरणों में संपन्न होगा। प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना 22 मई 2026 से 20 जून 2026 तक की जाएगी, जबकि द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी।
इससे पूर्व 07 मई से 21 मई 2026 के बीच स्व-गणना (Self Enumeration) का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इसके तहत इच्छुक नागरिक अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर स्वयं दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक होगी।
मुख्य प्रधान जनगणना अधिकारी ने बताया कि स्व-गणना के बाद एक SE ID जनरेट होगी, जिसे 22 मई से 20 जून 2026 के बीच घर-घर आने वाले प्रगणक को दिखाना होगा। प्रगणक द्वारा पुष्टि के बाद ही गणना प्रक्रिया पूर्ण मानी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्व-गणना अनिवार्य नहीं है और प्रगणक हर घर जाकर जानकारी अवश्य एकत्र करेंगे।
प्रदेश में जनगणना कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए 5.25 लाख से अधिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इसमें मंडल स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक के अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स और लगभग 5 लाख प्रगणक एवं पर्यवेक्षक शामिल हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि ‘जनगणना 2027’ देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी, जिससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुलभ होगी।
जनगणना अधिनियम 1948 एवं जनगणना नियमावली 1990 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनगणना में दी गई जानकारी को पूरी तरह गोपनीय रखा जाता है। इसका उपयोग न तो टैक्स, पुलिस या किसी अन्य जांच में किया जा सकता है और न ही इसे किसी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इन आंकड़ों का उपयोग केवल समेकित रूप में विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाता है।
प्रदेश में यह कार्य 75 जिलों, 783 नगरीय निकायों और 350 तहसीलों के अंतर्गत लगभग 1,04,000 ग्रामों में कराया जाएगा। इसके लिए 350 ग्रामीण चार्ज और 845 नगरीय चार्ज बनाए गए हैं। साथ ही लगभग 3.90 लाख मकान सूचीकरण ब्लॉक तैयार किए गए हैं, जिनमें प्रगणक घर-घर जाकर कार्य संपादित करेंगे।
अंत में मीडिया से अपील की गई कि वे जनगणना से जुड़ी जानकारी को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाएं। साथ ही नागरिकों से भी आह्वान किया गया कि वे सही और सटीक जानकारी साझा करें, जिससे जनकल्याणकारी योजनाओं का बेहतर निर्माण किया जा सके।
