श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग के साथ संपन्न हुई श्रीराम कथा।
मोंठ= निकटवर्ती ग्राम छपार में बीर हरदौल के स्थान पर आयोजित श्रीराम कथा एवं 11 कुंडीय विष्णु महायज्ञ के अंतिम दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक प्रसंग का सुंदर वर्णन किया गया।अंतिम दिन कथा व्यास साध्वी ज्योति शास्त्री ने रावण वध और श्रीराम राज्याभिषेक की कथा का अत्यंत प्रभावशाली एवं मार्मिक वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा व्यास ने कहा कि रावण वध केवल एक युद्ध का अंत नहीं, बल्कि अहंकार, अन्याय और अधर्म पर सत्य, धर्म और मर्यादा की विजय का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन के प्रत्येक चरण में आदर्शों और कर्तव्यों का पालन कर समाज को मर्यादा पुरुषोत्तम का स्वरूप प्रदान किया। श्रीराम राज्याभिषेक प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि रामराज्य न्याय, समानता, सुरक्षा और लोककल्याण की सर्वोत्तम व्यवस्था का प्रतीक है, जहां प्रत्येक व्यक्ति सुखी और संतुष्ट रहता है।
महायज्ञ में यज्ञाचार्य सतीश चंद्र शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से आहुतियां संपन्न कराईं। कथा के समापन अवसर पर गरौठा विधायक जवाहर लाल राजपूत के पुत्र राहुल राजपूत ने आयोजन स्थल पहुंचकर कथा व्यास साध्वी ज्योति शास्त्री को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
कथा के अंत में महाआरती उतारी गई और श्रद्धालुओं ने क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कथा व्यास ने कहा कि मंगलवार को कथा स्थल पर दो कन्याओं के सामूहिक विवाह सम्मलेन आयोजित किया जाएगा।
