भागवत कथा में सुदामा चरित्र के साथ हुआ समापन, हवन-पूजन के बाद भंडारा।
मोंठ = जन जागृति जनार्दन सेवा संघ के तत्वावधान में श्री राम जानकी मंदिर, छपार मोंठ में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का समापन शुक्रवार को श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हो गया। अंतिम दिन कथा व्यास नेत्रपाल शास्त्री ने सुदामा चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा सुनने के लिए क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता सच्चे प्रेम, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की भावनाओं को देखते हैं, धन-दौलत को नहीं। सुदामा चरित्र के माध्यम से सादगी, मित्रता और भक्ति का संदेश दिया गया। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए और पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
भागवत कथा समापन के अवसर पर विधि-विधान से हवन-पूजन कराया गया। श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां देकर परिवार और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। इसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के दौरान पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। आयोजन समिति ने कथा को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर अरुण ओझा, महेश मुदगिल, राजकुमार ओझा, सुंदरम चौबे, मोंटू माते, गौरीशंकर राजपूत, चंद्रभान राजपूत, मंगल मुखिया सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
