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बुंदेलखंड में गर्मियों में गोआश्रय में पशु रखने की बाध्यता खत्म करने की मांग

बुंदेलखंड में गर्मियों में गोआश्रय में पशु रखने की बाध्यता खत्म करने की मांग

मोंठ । बुंदेलखंड क्षेत्र में भीषण गर्मी के दौरान गोवंश को गोआश्रय स्थलों में रखने की अनिवार्यता समाप्त किए जाने की मांग उठी है। इस संबंध में विधायक जवाहर लाल राजपूत ने उत्तर प्रदेश के पशुधन मंत्री से मुलाकात कर उनको एक पत्र देकर व्यवस्था में बदलाव का अनुरोध किया है।

पत्र में कहा गया है कि शासन द्वारा अप्रैल माह में जनपदों के माध्यम से गोआश्रय स्थलों में गोवंश को रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जबकि बुंदेलखंड क्षेत्र में रबी फसल (चना, मसूर, मटर, सरसों, गेहूं) मार्च-अप्रैल में कटकर तैयार हो जाती है। इसके बाद अधिकांश खेत मई-जून तक खाली रहते हैं, जिससे किसानों को फसल सुरक्षा के लिए पशुओं को बांधकर रखने की आवश्यकता नहीं रहती और खुले पशुओं से कोई विशेष नुकसान भी नहीं होता।

विधायक ने पत्र में उल्लेख किया है कि दूसरी ओर सरकार को गोआश्रयों में पशुओं के चारे-पानी पर खर्च करना पड़ता है। साथ ही, बुंदेलखंड में मई-जून के दौरान अत्यधिक गर्मी पड़ती है, जिससे टिन शेड में रखे पशु हीट के कारण बीमार होकर मरने की स्थिति में पहुंच जाते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र की जलवायु अन्य भागों से भिन्न है और गर्मियों में तालाबों व पोखरों को भरने के लिए नहरों से पानी छोड़ा जाता है। ग्राम प्रधानों द्वारा लगातार यह मांग की जा रही है कि भीषण गर्मी में पशुओं को गोआश्रय स्थलों से मुक्त किया जाए, क्योंकि पानी की कमी और अत्यधिक तापमान के कारण पशुओं के बीमार होने और मृत्यु की घटनाएं सामने आ रही हैं।

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