हैदराबाद। तेजी से विकसित हो रहा हैदराबाद शहर आज देश के प्रमुख आईटी और शिक्षा केंद्रों में शामिल है। हर वर्ष हजारों की संख्या में छात्र, आईटी प्रोफेशनल और नौकरी की तलाश में युवा यहां पहुंचते हैं। बेहतर करियर और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद लेकर आने वाले इन लोगों के सामने पीजी (पेयिंग गेस्ट) और परेशानियां खड़ी कर रहे हैं।
माधापुर स्थित स्टार पीजी कोलिव में रहने वाले एक व्यक्ति बताते हैं कि उनके पीजी के मैनेजर का नाम डेविड है और मालिक का नाम श्रीनिवास है। जब भी वे नहाने जाते हैं, तो जो इलेक्ट्रिक शॉक की समस्या होती है, वह लंबे समय से बनी हुई है। पीजी में रहने वालों ने इसकी कई बार शिकायत भी की है, लेकिन कोई समाधान नहीं किया गया। यहाँ लिफ्ट खराब है, लेकिन लंबे समय से इसे ठीक नहीं किया गया है। सफाई के बाद कमरा खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे यह भी संभावना बनी रहती है कि कमरे से कुछ सामान गायब हो जाए या चोरी हो जाए तो क्या होगा? पीजी मालिक तो कह देगा कि यह उसकी जिम्मेदारी नहीं है, तो ऐसे में वे क्या करेंगे। इसके अलावा भी वहां भी कई तरह की समस्याएँ बनी हुई हैं।
असल में, हैदराबाद के हाईटेक सिटी, गाचिबोली और कोंडापुर जैसे आईटी हब क्षेत्रों में पीजी की मांग लगातार बढ़ रही है। बढ़ती मांग के मुकाबले गुणवत्तापूर्ण पीजी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण युवाओं को समझौता करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। शहर में पीजी का किराया 8,000 से 20,000 रुपये प्रति माह तक पहुंच चुका है। इसके अलावा सिक्योरिटी डिपॉजिट, बिजली-पानी के अलग शुल्क और मेंटेनेंस फीस जैसे अतिरिक्त खर्च इसे और महंगा बना देते हैं। मध्यम वर्गीय और छात्र वर्ग के लिए यह खर्च बड़ा आर्थिक बोझ बनता जा रहा है।
कई पीजी में एक छोटे कमरे में तीन से चार लोगों को ठहराया जाता है। इससे न केवल व्यक्तिगत स्पेस की कमी होती है, बल्कि पढ़ाई और कामकाज में भी बाधा उत्पन्न होती है। लगातार भीड़भाड़ और शोरगुल मानसिक तनाव को बढ़ावा देता है। पीजी में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें आम हैं। अधिकतर जगहों पर भोजन एक जैसा, बेस्वाद और पोषण की दृष्टि से कमजोर होता है। स्वच्छता के मानकों में कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिसके चलते कई लोग बाहर भोजन करने को मजबूर होते हैं।
कई पीजी में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते। सीसीटीवी और सुरक्षा गार्ड की अनुपस्थिति चिंता का विषय है। कई बार नियमों में बिना पूर्व सूचना के बदलाव कर दिया जाता है, जिससे निवासियों को परेशानी होती है।
सरकार को पीजी संचालकों के लिए सख्त नियम और पंजीकरण प्रणाली लागू करनी चाहिए। साथ ही किराए और सुविधाओं की निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए। तकनीकी प्लेटफॉर्म पर सत्यापित लिस्टिंग और रिव्यू सिस्टम को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।
हैदराबाद में पीजी व्यवस्था आज शहरी जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, लेकिन इसकी वर्तमान स्थिति कई गंभीर चुनौतियों से घिरी हुई है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
जरूरत है पारदर्शी व्यवस्था, सख्त नियमों और जागरूक उपभोक्ताओं की, ताकि सपनों के इस शहर में आने वाला हर युवा सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जी सके।
