मोंठ। कस्बे के धार्मिक स्थल शीतला धाम में आयोजित 111 कुंडीय श्री सतचंडी महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा में रविवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। कथा व्यास पंडित रवि महाराज ने प्रवचन के दौरान श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रमुख प्रसंगों—सुखदेव प्रकट्य एवं राजा परीक्षित के श्राप—का मार्मिक वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि महर्षि वेदव्यास के पुत्र श्री शुकदेव जी का प्रकट्य एक दिव्य घटना थी। जन्म से ही वैराग्य धारण कर उन्होंने संसार के मोह-माया से दूर रहते हुए भक्ति और आत्मज्ञान का संदेश दिया। उनके जीवन से मानव को सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
कथा के दौरान राजा परीक्षित के श्राप प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि एक बार तपस्वी ऋषि के अपमान से आहत होकर उनके पुत्र ने परीक्षित को सात दिन में तक्षक नाग के डंसने का श्राप दिया। इसके बाद राजा परीक्षित ने राजपाट त्यागकर गंगा तट पर भगवान की भक्ति करते हुए श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया, जो मानव जीवन के कल्याण का मार्ग दर्शाती है।
कथा व्यास ने संत, ब्राह्मण एवं गुरु की महिमा पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि चौरासी लाख योनियों में मनुष्य जीवन सर्वश्रेष्ठ है और इसका सदुपयोग भक्ति एवं सत्कर्मों में करना चाहिए।
महायज्ञ के अंतर्गत सुबह बनारस से आए विद्वान आचार्यों द्वारा विधि-विधान से पूजन कराया जा रहा है। श्रीमद्भागवत कथा के उपरांत श्री शतचंडी यज्ञ में मंत्रोच्चार के बीच हवन कुंडों में आहुतियां डलवाई जा रही हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
कार्यक्रम के दौरान कथा परीक्षित द्वारा श्रीमद्भागवत कथा की आरती की गई। श्री शतचंडी यज्ञ के परीक्षत द्वारा हवन कुंड की विधिवत आरती की गई।
धार्मिक अनुष्ठान के आयोजक महंत विकास गिरी खड़ेश्वरी महाराज ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने आए सैकड़ों श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार होता है।
कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजन-कीर्तन से पूरा पंडाल गुंजायमान रहा और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर धर्मलाभ प्राप्त करते रहे। आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से कार्यक्रम में पहुंचकर कथा एवं महायज्ञ का लाभ लेने की अपील की।
कार्यक्रम में राजेंद्र नायक अशोक श्रीवतास्तव महेंद्र राजपूत पुजारी नाथू सिंह राठौर सहित तमाम् लोग मौजूद रहे।
धार्मिक कार्यक्रम में रात के समय श्री रामचरित का मंचन किया जा रहा है जिसमें ताड़का वध की लीला का वर्णन किया गया
