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वन्यजीव अपराधों की सटीक जानकारी से ही संभव है अपराधियों पर शिकंजा: मुख्य वन संरक्षक

झांसी में बुंदेलखंड जोन स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, फॉरेस्ट एक्ट व वन्यजीव संरक्षण कानूनों पर मिला प्रशिक्षण

झांसी। वन्यजीवों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की गहन जानकारी और कानूनों की स्पष्ट समझ के बिना अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई संभव नहीं है। यह बात मुख्य वन संरक्षक बुंदेलखंड जोन एच.वी. गिरीश ने वन मुख्यालय स्थित “वेत्रवाती सभागार” में आयोजित बुंदेलखंड जोन स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर कही। कार्यशाला का आयोजन वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो, नई दिल्ली के सौजन्य से किया गया।

कार्यशाला में वन संरक्षक झांसी व बांदा के अलावा उरई, झांसी, ललितपुर, हमीरपुर, महोबा और बांदा जिलों के प्रभागीय वनाधिकारी, उप प्रभागीय वनाधिकारी, क्षेत्रीय वनाधिकारी, वन दरोगा, वन रक्षक सहित अन्य फील्ड स्टाफ ने भाग लिया।

मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि कार्यशाला में कानूनी सुदृढ़ीकरण पर विशेष जोर दिया गया। इसमें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की शिकार एवं अवैध व्यापार संबंधी धाराओं का गहन विश्लेषण किया गया। अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों को अपराध स्थल की सुरक्षा, साक्ष्य संकलन और केस को मजबूत बनाने के लिए तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही वन्यजीव अंगों की तस्करी रोकने, खुफिया जानकारी विकसित करने, फोरेंसिक साक्ष्यों के उपयोग और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की समझ पर भी चर्चा हुई।

कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में सामाजिक वानिकी वन प्रभाग से आए विष्णु राज नायर (आईएफएस) ने वन एवं वन्यजीव प्रबंधन से जुड़े कानूनों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट तथा भारतीय वन अधिनियम, 1927 की प्रमुख धाराओं को समझाया। मानव-वन्यजीव संघर्ष और पर्यटन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर अर्नव वासु ने वन्यजीव एवं वन संपदा से जुड़े सुरक्षा कानूनों का प्रशिक्षण दिया। वहीं लीगल एडवाइजर सुरेश चंद्र यादव ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धारा 38(र) सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धाराओं और उपधाराओं की जानकारी के अभाव में कई बार अपराधी छूट जाते हैं, इसलिए विवेचकों को विधिक प्रावधानों की पूरी समझ होना आवश्यक है।

प्रशिक्षण के दौरान केस दर्ज करने, फर्द बरामदगी तैयार करने, जब्ती (सीजर) की प्रक्रिया, साक्ष्यों व नमूनों का सुरक्षित संकलन, गवाहों से पूछताछ, अभिलेखीकरण और तकनीकी विधिक पहलुओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया। साथ ही शिकार, वन्यजीवों व उनके अंगों की तस्करी, अवैध कटान, प्राकृतिक आवास से छेड़छाड़ तथा बरामद वाहन व अस्त्र-शस्त्र पर लगने वाली धाराओं की व्याख्या की गई।

कार्यशाला में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में स्थानीय समुदाय की भूमिका और वैकल्पिक आजीविका के महत्व पर भी चर्चा हुई। क्षेत्रीय वनाधिकारी ने रेंज क्षेत्र में पर्यटन संभावनाओं को बढ़ाने के सुझाव प्रस्तुत किए।

अंत में वन संरक्षक झांसी महावीर कौजालगी ने बुंदेलखंड जोन से आए सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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