
आरएसएस के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भव्य हिंदू सम्मेलन, एकता व राष्ट्र निर्माण का दिया संदेश
मोंठ (झांसी)। कस्बा स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में गुरुवार को भव्य हिंदू सम्मेलन एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में धर्मगुरु महंत वैदेही वल्लभ जी महाराज उपस्थित रहे। संगोष्ठी में वक्ताओं ने हिंदू एकता, सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा तथा राष्ट्र निर्माण में संगठित समाज की भूमिका पर विस्तार से विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। विद्यालय परिवार की ओर से मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंटकर स्वागत किया गया। इसके पश्चात संगोष्ठी सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
मुख्य अतिथि महंत वैदेही वल्लभ जी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसकी एकता, संस्कारों और सांस्कृतिक चेतना में निहित है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज सदैव से सहिष्णु, उदार और समन्वयकारी रहा है, किंतु वर्तमान समय में अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों की रक्षा के लिए संगठित रहना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि परिवार व्यवस्था, नैतिक शिक्षा और संगठनात्मक शक्ति को सुदृढ़ कर ही राष्ट्र को मजबूत बनाया जा सकता है। उनका कहना था कि जब समाज संगठित और जागरूक होता है, तभी राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है।
धर्मगुरु ने कहा कि हिंदू एकता आज के प्रत्यक्ष में बहुत जरूरी है विश्व के विभिन्न देशों में जिस तरह हिंदू समाज के लोगों का सरेआम कत्लेआम किया जा रहा है उससे सीख लेते हुए एकजुट होना बहुत आवश्यक है हमारा परिवार हिंदू समाज बहुत बड़ा विशाल परिवार है इसमें जाति के नाम पर अलग-अलग ना हो। जाति प्रथा खत्म हो और सभी हिन्दू भाई संगठित होकर सनातन धर्म की रक्षा के लिए सनातन धर्म की आगे बढ़ाने के लिए एक जुट होकर काम करें।
उन्होंने कहा कि अब केवल ओम शांति से काम नहीं चलेगा ओम शांति के साथ ओम क्रांति पर भी अमल करना होगा तभी सनातन धर्म की रक्षा हो पाएगी एक समय जब देश के अंदर अंग्रेजों का राज था उसे समय महात्मा गांधी ओम शांति का नारा दे रहे थे लेकिन उनके साथ सरदार भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद लाला लाजपत राय जैसे ओम क्रांति का नारा दे रहे थे। क्रांतिकारी साथी ओम क्रांति का नारा दे रहे थे जिनके बलिदान से हमें आजादी मिली है आज भी हिंदू समाज को जाति बिरादरी को समाप्त कर एकजुट होकर सनातन धर्म और हिंदू समाज की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए और एक झुकता के साथ काम करना चाहिए
वक्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने बीते एक शताब्दी में सेवा, संस्कार और संगठन के माध्यम से समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शिक्षा, ग्राम विकास, सामाजिक समरसता और आपदा राहत जैसे कार्यों में स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका को रेखांकित किया गया। बताया गया कि शाखाओं के माध्यम से युवाओं में अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जाती है।
संगोष्ठी में सामाजिक समरसता पर विशेष बल दिया गया। वक्ताओं ने जातीय और सामाजिक विभाजनों को समाप्त कर आपसी सद्भाव बढ़ाने का संदेश दिया। कहा गया कि हिंदू एकता केवल नारों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यवहार और जीवन मूल्यों में भी परिलक्षित हो। युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य उमाशंकर द्विवेदी ने किया। सम्मेलन में जिला प्रचारक चंदन, शिवा राजे बुंदेला, कपिल मुदगिल, राजेंद्र नायक, देवेंद्र गोसाई, दिनेश राजपूत, पवन सोनी, डॉ. योगेश त्रिपाठी, चंद्रभान तिवारी, लखपत पांचाल, चिंतामणि पाल, चंद्रभान यादव, काशीराम बाबूजी, सुमित बंशकार, संतोष यादव, शिवम वाल्मीकि, सुरजीत राजपूत, जीतू सोनी, वीरप्रताप चौहान, धुर्व परमार, रवि पाल, धीरू चौहान, मोनू नगाइच, गोल्डी निरंजन सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षक व युवा उपस्थित रहे।
अंत में आयोजकों ने उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। आयोजकों ने भविष्य में भी ऐसे वैचारिक कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।
