एंटीबायोटिक दवाओं का असर घटा, मरीजों में बढ़ी चिंता।
मोंठ: लगातार बदलते मौसम और बढ़ते संक्रमण के बीच एक गंभीर समस्या सामने आ रही है। आमतौर पर दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं अब हर दूसरे मरीज पर प्रभावी साबित नहीं हो रहीं। चिकित्सकों के अनुसार दवाओं के नियमित सेवन के बावजूद मरीजों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है, जिससे इलाज की अवधि बढ़ती जा रही है।
स्थानीय अस्पतालों और निजी क्लीनिकों में पहुंच रहे मरीजों में खांसी, बुखार, गले में संक्रमण, पेट संबंधी रोग और त्वचा संक्रमण जैसे मामलों में एंटीबायोटिक का असर कमजोर देखा जा रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि इसका प्रमुख कारण एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस यानी दवाओं के प्रति रोगाणुओं की प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ना है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ एमपी राजपूत के मुताबिक बिना जांच के दवा लेना, अधूरा कोर्स छोड़ देना और छोटी-छोटी बीमारियों में भी एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। कई मामलों में अब पहले से अधिक शक्तिशाली दवाएं या लंबा इलाज करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
उन्होंने अपील की है कि बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक का सेवन न करें और चिकित्सक द्वारा बताए गए पूरे कोर्स का पालन अवश्य करें। साथ ही स्वच्छता, संतुलित आहार और समय पर जांच को अपनाकर ही इस बढ़ती समस्या से बचा जा सकता है। यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो भविष्य में सामान्य संक्रमण भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।
