उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा बुंदेलखंड में पर्यटन अनुभव को समृद्ध बनाने की खास पहल
अब झांसी की सड़कों पर ऑटो-ई-रिक्शा चालक बनेंगे “हेरिटेज एम्बेसडर”, सुनाएंगे विरासत से जुड़ी कहानियां
‘
झांसी : अयोध्या, काशी, मथुरा के बाद अब बुंदेलखंड की ऐतिहासिक धरती पर पर्यटन को नई दिशा देने की कवायद तेज हुई है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की ओर से झांसी में 28-29 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में 150 से अधिक स्थानीय ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को प्रशिक्षित किया गया। अब ये चालक पर्यटकों को यात्रा के दौरान बुंदेलखंड की विरासत से संबंधित जानकारी और शौर्य गाथाएं भी सुनाएंगे।
बुंदेलखंड आने वाले पर्यटक सफर के दौरान ही शहर के किलों, स्मारकों और ऐतिहासिक घटनाओं की कहानियों से रूबरू होंगे, जिससे उनकी यात्रा यादगार बनेगी।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड का ऐतिहासिक शहर झांसी स्वयं में अनेक वीर गाथाएं समेटे है। यह शहर रानी लक्ष्मीबाई की वीरता, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, झांसी का किला और रानी महल के लिए प्रसिद्ध है।
उन्होंने बताया कि ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को स्टोरी टेलिंग सहित विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण देकर केवल सेवा प्रदाता नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की संस्कृति और इतिहास का संवाहक बनाया जा रहा है। इससे पर्यटकों का अनुभव समृद्ध होगा और स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
‘अतिथि देवो भवः’ मूल मंत्र
राही टूरिस्ट बंगला, झांसी में आयोजित चालक प्रशिक्षण कार्यक्रम में एमकेआईटीएम के स्टोरी टेलर गौरव श्रीवास्तव ने प्रशिक्षुओं को पर्यटन स्थलों के इतिहास को रोचक कहानियों के माध्यम से प्रस्तुत करने की प्रभावशाली शैली से अवगत कराया।
सत्र के दौरान यह भी बताया गया कि किस प्रकार बुंदेलखंड के पर्यटन स्थलों से जुड़ी लोक कथाएं और मानवीय भावनाएं मिलकर एक साधारण यात्रा को यादगार अनुभव में बदल सकती हैं।
ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को निर्देशित किया गया कि यात्रा के दौरान गंतव्य से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी पर्यटकों को दी जाए, जिससे पर्यटन स्थलों के प्रति उनका रुझान बढ़े। साथ ही ‘अतिथि देवो भवः’ के मूल मंत्र को ध्यान में रखते हुए शिष्टाचारपूर्ण संवाद के महत्व पर भी जोर दिया गया।
ऑनलाइन पेमेंट और प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण
यात्रा के दौरान किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए चालकों को प्राथमिक उपचार का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। डिजिटल युग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें ऑनलाइन पेमेंट प्रणाली के उपयोग की जानकारी भी प्रदान की गई।
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले किशन साहू, संदीप तिवारी सहित अन्य चालकों ने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के इस प्रयास को सराहनीय बताया। इस अवसर पर विभाग की ओर से ऑटो और ई-रिक्शा चालकों को स्मृति चिन्ह के रूप में टी-शर्ट भेंट की गई।
‘सालभर में 1.34 करोड़ पर्यटक पहुंचे झांसी’
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक वैभव को केंद्र में रखते हुए बुंदेलखंड के विभिन्न स्थलों का सुनियोजित पर्यटन विकास किया जा रहा है।
इसमें झांसी, महोबा, बांदा, ललितपुर, हमीरपुर सहित अन्य प्रमुख गंतव्य शामिल हैं। पर्यटन की अपार संभावनाओं से भरपूर बुंदेलखंड को उत्तर प्रदेश सरकार पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय और राज्य की राजधानी में प्रदर्शित झांकी भी बुंदेलखंड थीम पर आधारित थी। वर्ष 2025 में झांसी में 1.34 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन बेहतर पर्यटन भविष्य की ओर संकेत करता है।
