समथर — जीवात्मा और परमात्मा का मिलन का नाम महारास लीला है ” उक्त उद्गार नगर के बीजासेन माता मंदिर प्राँगढ में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से कथा व्यास आचार्य ऋषभ देव शास्त्री ने व्यक किये ।। नगर के आदिशक्ति बीजासेन माता मन्दिर प्रांगढ में संत बालकदासजी महाराज के सानिध्य में ध्वार की माता मंदिर एवं रामगढ़ माता मंदिर के लिये 121 खप्पर जवारे बोये गये है । मंदिर प्रांगढ़ में शतचंडी पाठ एवं श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है एवं रात्रि में नित्यप्रति भजन गायन हो रहा है । बीजासेन माता मंदिर प्रांगढ़ में चल रही भागवत कथा में छटवें दिवस कथा व्यास ने महारास लीला और रुक्मणी मंगल की कथा का संगीतमय बर्णन किया । उन्होंने कहा कि जीवात्मा के परमात्मा से मिलन की अलौकिक लीला का नाम ही महारास लीला है । यह लीला ठाकुरजी की काम विजय लीला है । रासलीला का चिंतन करने से जीव की काम बासना नष्ट हो जाती है । रुक्मणी मंगल की कथा में उन्होंने कहा कि जीव का धर्म शरणागति है । जीव यदि दीन भाव से भगवान की शरणागत होता है तो वे उसे अपनी शरण मे ले लेते है । रुक्मणी के आर्त भाव से पुकारने पर श्रीकृष्ण ने उन्हें अपना लिया । कथा बाचक ने गोपी गीत,कंस बध, उद्धव ब्रज यात्रा,रणछोर लीला,द्वारिकापुरी निर्माण, मुचकुंद की कथा,श्रीकृष्ण रुक्मणी विवाह,आदि प्रसंवों का संगीतमय बर्णन किया । कथा के बीच गाये गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर झूम उठे । कथा पारीक्षत श्रीमती राजकुमारी गोविंदसिंह पाल ने भागवत जी की आरती की । इस अवसर पर संजय व्यास,पिंकू दांगी, रमाकांत तिवारी,शैली नगाइच,अंजनी खजांची,लाखन,भगवत,पिंकू बुधौलिया,अशोक शर्मा,गोविंद पाल,मोहित,अमित कुशवाहा, पंचम,राजीव,छबिराम , ज्ञानसिंह आदि भारी संख्या में लोग मौजूद रहे ।
