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आईटी सिटी योजना में जमीन के रेट घटे, निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी

दो साल में प्रदेश के पांच शहरों में शुरू होंगी नई आवासीय योजनाए

लखनऊ

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने निवेशकों और आमजन को राहत देते हुए आईटी सिटी योजना सहित अपनी पुरानी व नई योजनाओं में जमीन की दरों में बड़ी कटौती का निर्णय लिया है। परिषद की बोर्ड बैठक में नई गणना नीति को मंजूरी मिलने के बाद अब भूखंडों की कीमतों में औसतन 25 प्रतिशत तक की कमी आएगी।

परिषद के सचिव नीरज शुक्ला ने बताया कि लखनऊ की वृंदावन योजना में विकसित की जा रही आईटी सिटी में अब जमीन की कीमत आवासीय दर के बराबर कर दी गई है। पहले यह दर आवासीय से डेढ़ गुना थी। उन्होंने बताया कि 10 एकड़ से अधिक भूमि खरीदने वाले निवेशकों को आवासीय दर से लगभग 10 प्रतिशत तक कम कीमत पर जमीन उपलब्ध कराई जाएगी।

निविदाएं न मिलने पर लिया गया निर्णय

उप आवास आयुक्त पल्लवी मिश्रा ने बताया कि आईटी सिटी के लिए चार बार निविदाएं आमंत्रित की गईं, लेकिन अधिक दरों के कारण कोई भी खरीदार सामने नहीं आया। इसी को देखते हुए बोर्ड ने दरों में संशोधन का फैसला लिया है।

वहीं उप आवास आयुक्त चंदन पटेल ने जानकारी दी कि आईटी सिटी क्षेत्र में वर्तमान में आवासीय जमीन का औसत रेट करीब 38 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जो पहले आईटी उपयोग के लिए बढ़कर लगभग 58 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर हो जाता था। नई नीति से यह अंतर समाप्त हो जाएगा।

पुरानी योजनाओं की संपत्तियों को मिलेगी राहत

परिषद अधिकारियों के अनुसार वर्षों से नहीं बिक पा रही संपत्तियों को पहले निष्प्रयोज्य घोषित किया जाएगा, जिसके बाद उनके रेट कम किए जाएंगे। नई योजनाओं में लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क भी घटाए गए हैं।
पार्क फेसिंग भूखंडों पर लगने वाला अतिरिक्त शुल्क 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि सेंटेज चार्ज 20 से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।

सशस्त्र व अर्द्धसैनिक बलों को विशेष छूट

परिषद के सचिव नीरज शुक्ला ने बताया कि पहले आओ–पहले पाओ योजना के तहत अब सशस्त्र सेनाओं और अर्द्धसैनिक बलों के सेवारत व सेवानिवृत्त कर्मियों को फ्लैट खरीद पर 20 प्रतिशत की विशेष छूट दी जाएगी। सामान्य खरीदारों के लिए भुगतान अवधि के अनुसार 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान रहेगा। यह योजना 31 जनवरी तक लागू रहेगी।

पांच जिलों में नई आवासीय योजनाएं

परिषद के अनुसार मऊ, गाजीपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़ और गोरखपुर में नई आवासीय योजनाएं शुरू करने के लिए शासन से अनुमति ली जाएगी। प्रतापगढ़ की 141 हेक्टेयर की योजना छह माह के भीतर लॉन्च होगी, जबकि मऊ की 64 हेक्टेयर की योजना एक वर्ष में शुरू की जाएगी। अन्य तीन योजनाएं करीब डेढ़ वर्ष में शुरू होंगी।

कानपुर मंधना योजना का समाधान

कानपुर की मंधना आवासीय योजना को लेकर लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद पर भी समाधान निकाल लिया गया है। परिषद सचिव ने बताया कि 229 हेक्टेयर की इस योजना में तीन गांवों में लैंड पूलिंग मॉडल लागू किया जाएगा, जिससे योजना को शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

शैक्षिक भूखंडों पर सख्त रुख

परिषद अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में स्कूलों के लिए आवंटित करीब 100 भूखंडों पर अब तक निर्माण नहीं हुआ है। ऐसे आवंटियों को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर मानचित्र पास कराने के निर्देश दिए जाएंगे, अन्यथा जुर्माना या आवंटन निरस्तीकरण पर विचार किया जाएगा।

350 करोड़ की फंसी योजना खुलेगी

गाजियाबाद की वसुंधरा योजना-3 में किसानों से जुड़े विवाद के समाधान के तहत अब 35 वर्ग मीटर के भूखंड देने का निर्णय लिया गया है। इससे परिषद की करीब 350 करोड़ रुपये की फंसी योजना को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

ई-नीलामी के नियमों में बदलाव

उप आवास आयुक्त पल्लवी मिश्रा ने बताया कि ई-नीलामी में बार-बार अत्यधिक बोली लगाकर संपत्ति न खरीदने की समस्या को देखते हुए नियमों में बदलाव किया गया है। अब दो बार नीलामी के बाद यदि उच्च कीमत नहीं आती है तो संपत्ति को परिषद की निर्धारित दर पर नीलामी में रखा जाएगा।

अन्य प्रमुख फैसले

मुरादाबाद नगर निगम कार्यालय के लिए भूखंड उपयोग में परिवर्तन

सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो को कार्यालय निर्माण की अनुमति

प्रतापगढ़ योजना में किसानों से सहमति से भूमि क्रय

परिषद कर्मचारियों को 1 जुलाई 2025 से 58 प्रतिशत महंगाई भत्ता

इन निर्णयों से आवास विकास परिषद की योजनाओं को गति मिलने के साथ ही निवेशकों और आम जनता को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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