उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बाहर की ब्रांडेड दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट आदेश दिया है कि सरकारी अस्पतालों में केवल स्टॉक में उपलब्ध दवाएं ही लिखी जाएं, बाहर की दवा लिखना अब निलंबन योग्य अपराध माना जाएगा।
निर्देशों के मुताबिक—
OPD के समय डॉक्टर की अनुपस्थिति पर CMS (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) भी होंगे जिम्मेदार।
मरीज यदि चाहे तो बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टर के खिलाफ शिकायत कर सकता है, जिसकी सूचना महानिदेशक स्वास्थ्य तक भी भेजी जा सकती है।
शासन स्तर की तीन टीमें 15 नवंबर के बाद प्रदेशभर में निरीक्षण करेंगी और अस्पतालों की कार्यप्रणाली की जांच करेंगी।
सरकार का यह कदम आम जनता को राहत देने और सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
