पूंछ के अमृत सरोवर तालाबों की दुर्दशा: दो वर्ष में ही उजड़ गई सुंदरता, जिम्मेदारों की अनदेखी से ग्रामीण में नाराजगी
पूंछ।
स्वच्छ भारत मिशन और जल संरक्षण के उद्देश्य से सरकार ने जिस “अमृत सरोवर योजना” की शुरुआत की थी, वह अब उपेक्षा की भेंट चढ़ती दिख रही है। जनपद झांसी के मोठ ब्लॉग के पूंछ क्षेत्र के ग्राम पनारी, ग्राम खिल्ली, ग्राम खकल, ग्राम सेसा आदि में दो वर्ष पूर्व लाखों रुपये की लागत से बनाए गए अमृत सरोवर तालाब आज अपनी पहचान खो चुके हैं। जिन तालाबों को सौंदर्यीकरण कर ग्रामवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाना था, वे आज गंदगी और लापरवाही का प्रतीक बन चुके हैं।गांव के लोगों का कहना है कि दो साल पहले जब यह तालाब बनाए गए थे, तो उम्मीद थी कि ये जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामवासियों के लिए स्वच्छ व मनोरंजन का स्थान बनेंगे। शुरुआत में तालाब के चारों ओर पेड़ लगाए गए, बैठने के लिए कुर्सियां लगाई गईं और किनारों की सजावट की गई थी। लेकिन समय बीतने के साथ जिम्मेदार विभागों की अनदेखी ने इन अमृत सरोवरों को “उजड़े बाग” में तब्दील कर दिया है।अब स्थिति यह है कि तालाबों के चारों ओर कटीले झाड़ उग आए हैं, जिससे आसपास जाना भी मुश्किल हो गया है। जिन पेड़ों से हरियाली की उम्मीद थी, वे या तो सूख चुके हैं या जानवरों ने नष्ट कर दिए हैं। बैठने के लिए लगाई गई कुर्सियां टूटकर बेकार पड़ी हैं। सबसे खराब स्थिति तालाबों के पानी की है। पानी में लगातार गंदगी जमा होने से यह पीने तो दूर, देखने लायक भी नहीं बचा। गांववाले बताते हैं कि तालाबों में रोज जानवर नहाते रहते हैं, जिससे पानी पूरी तरह दूषित हो गया है।
ग्राम प्रधान और अफसरों की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस समस्या की शिकायत ग्राम प्रधान, ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी से की, लेकिन किसी ने कोई कार्रवाई नहीं की। न तो सफाई कराई गई और न ही झाड़ियों की कटाई। जिम्मेदारों की इस अनदेखी के कारण ग्रामवासियों में भारी नाराजगी है।
ग्रामीण बोले – योजना का उद्देश्य हुआ बेकार
ग्रामवासी रमेश कुमार और विजय का कहना है कि सरकार ने अमृत सरोवर योजना जल संरक्षण के लिए चलाई थी, लेकिन लापरवाही के चलते इसका कोई लाभ नहीं हो रहा। “यह तालाब अब मच्छरों और गंदगी का अड्डा बन चुका है। बरसात में चारों ओर कीचड़ और बदबू फैल जाती है।” ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द सफाई और मरम्मत नहीं कराई गई, तो यह योजना पूरी तरह विफल हो जाएगी।
अधिकारी बने मौन दर्शक
जब इस संबंध में ग्राम विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी से बात की गई, तो उन्होंने निरीक्षण का आश्वासन तो दिया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यह स्थिति केवल एक गांव की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के कई अमृत सरोवरों की है, जो रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे नष्ट होते जा रहे हैं।
सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना यदि समय-समय पर निगरानी और रखरखाव से जुड़ी रहे, तो यह ग्रामीण विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकती है। लेकिन पूंछ के इन अमृत सरोवरों की बदहाल हालत यह बताने के लिए काफी है कि योजनाएं केवल निर्माण तक सीमित रह गई हैं, रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द सफाई, मरम्मत और हरियाली पुनर्स्थापना का कार्य शुरू किया जाए, ताकि ये सरोवर फिर से अपने नाम के अनुरूप “अमृत” बन सकें।
रिपोर्टर विकास अग्रवाल पूंछ
