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समंथर — अक्षय नवमी का पर्व नगर एवं क्षेत्र में भक्ति एवम श्रद्धा के साथ मनाया गया ।

समंथर — अक्षय नवमी का पर्व नगर एवं क्षेत्र में भक्ति एवम श्रद्धा के साथ मनाया गया । इस अवसर पर महिलाओं ने बिधि बिधान के साथ आँवला बृक्ष की पूजा अर्चना कर परिक्रमा की एवं नगर की पृथ्वी परिक्रमा लगाई । कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी तिथि को परम पुण्य दायक अक्षय नवमी के नाम से जाना जाता है | ऐसी मान्यता है कि कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी से ही द्वापर युग की शुरुआत हुई थी । इस तिथि को युगादि तिथि भी कहा जाता है | इसी दिन श्री हरि विष्णु ने कुष्मांडक दैत्य को मारा था | मान्यता है कि अक्षय नवमी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक श्री हरि विष्णु आंवले के वृक्ष पर निवास करते है । इसी कारण अक्षय नवमी को आंवला पूजन सम्पूर्ण स्त्री जाति के लिए धन संपत्ति , सौभाग्य वृद्धि तथा सन्तान सुख प्राप्ति कारक माना जाता है | इस दिन पूजन अर्चन ,स्नानदान तथा परोपकार करने से अक्षय पुण्य फल की प्राप्ति होती है |इस नवमी को पति-पत्नी को साथ में उपासना करने से परम शांति , सौभाग्य ,सुख एवं उत्तम संतान की प्राप्ति होती है | साथ ही साथ पुनर्जन्म के बंधन से मुक्ति भी मिलाती है | बिधान के अनुसार आंवले के वृक्ष के नीचे पूर्व दिशा में बैठकर पूजन कर उसकी जड़ में दूध चढ़ाया जाता है इसके बाद अक्षत, पुष्प, चंदन से पूजा-अर्चना कर और पेड़ के चारों ओर कच्चा धागा बांधकर कपूर, बाती या शुद्ध घी की बाती से आरती करते हुए सात बार परिक्रमा की जाती है और कथा सुनी जाती है और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धा भाव के साथ खीर, पूड़ी, सब्जी और मिष्ठान आदि का भोग लगाया जाता है । आंवला के वृक्ष की पूजा कर 108 बार परिक्रमा करने से समस्त मनोकामनाएं पूरी होतीं हैं ।

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