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होली पर टेशू के फूलों से बने गुलाल का करें उपयोग, त्वचा रहेगी सुरक्षित — डॉ. उमाशंकर तिवारी

होली पर टेशू के फूलों से बने गुलाल का करें उपयोग, त्वचा रहेगी सुरक्षित — डॉ. उमाशंकर तिवारी

मोंठ: रंगों का त्योहार होली आते ही बाजारों में गुलाल और रंगों की खरीदारी शुरू हो गई है। इस बीच आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. उमाशंकर तिवारी ने लोगों से प्राकृतिक और हर्बल रंगों के उपयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि टेशू (पलाश) के फूलों से तैयार किया गया गुलाल और रंग त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित होता है और किसी प्रकार की एलर्जी या संक्रमण का खतरा नहीं रहता।
डॉ. तिवारी ने बताया कि बाजार में मिलने वाले कई रंगों और गुलाल में हानिकारक रसायन मिलाए जाते हैं, जो त्वचा, आंखों और बालों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रासायनिक रंगों के कारण खुजली, जलन, दाने और त्वचा संबंधी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। विशेष रूप से बच्चों और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को इससे अधिक खतरा रहता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि इस बार पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग करें। टेशू के फूलों को पानी में भिगोकर या सुखाकर आसानी से घर पर रंग तैयार किया जा सकता है। इससे न केवल त्वचा सुरक्षित रहेगी बल्कि पारंपरिक और प्राकृतिक होली का आनंद भी मिलेगा।
डॉ. तिवारी ने सभी नागरिकों से सुरक्षित, स्वच्छ और खुशहाल होली मनाने का संदेश दिया।

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मोंठ–नगर क्षेत्र में प्रतिबंध के बावजूद पॉलीथिन का उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। बाजारों, सब्जी मंडियों और किराना दुकानों पर दुकानदार धड़ल्ले से ग्राहकों को पॉलीथिन थमाते नजर आ रहे हैं।