समथर — नगर के आदिशक्ति बीजासेन माता मन्दिर प्रांगढ में संत बालकदासजी महाराज के सानिध्य में ध्वार की माता मंदिर एवं रामगढ़ माता मंदिर के लिये 121 खप्पर जवारे बोये गये है । मंदिर प्रांगढ़ में शतचंडी पाठ एवं श्रीमद भागवत कथा का आयोजन चल रहा है एवं रात्रि में नित्यप्रति भजन गायन हो रहा है । श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास द्वारा अजामिल आख्यान,ध्रुव चरित्र,गजेंद्र मोक्ष,बामन अवतार,की कथाओं का संगीतमय बर्णन किया गया । कथा बाचक ऋषभ देव शास्त्री भागवताचार्य ने अजामिल,ध्रुब,प्रह्लाद चरित्र की कथा का बर्णन करते हुए कहा कि भगवान का नाम स्मरण समस्त पापों का विनाश कर देता है । जीव का उद्धार जप और नाम स्मरण अर्थात भजन से ही होता है । मानव जीवन भगवान का भजन एवं धर्म आचरण के लिए ही मिला है । नाम संकीर्तन के बिना कथा परिपूर्ण नहीं है । भजन के प्रभाव से सात्विक गुणों की बृद्धि होती है और ज्ञान की प्राप्ति होती है । भक्ति योग की महिमा का बर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भक्ति रस सभी रसों में उत्तम है । भक्ति को किसी भी आलंबन की आवश्यकता नहीं है । ज्ञान विज्ञान आदि सभी भक्ति के अधीन हैं । कथा व्यास द्वारा कपिल देवहूति संबाद,सांख्य शास्त्र बर्णन, धर्म निरूपण,ध्रुब,प्रह्लाद चरित्र,नरसिंह अवतार,गजेंद्र मोक्ष,समुद्र मंथन,राजा बलि की कथा,बामन अवतार,मत्स्यावतार आदि कथाओं का संगीतमय बर्णन किया गया । कथा के बीच गाये गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर झूम उठे । कथा पारीक्षत श्रीमती राजकुमारी गोविंद सिंह पाल ने भागवतजी की आरती की । इस अवसर पर संजय व्यास,पिंकू दांगी, रमाकांत तिवारी,शैली नगाइच,अंजनी खजांची,लाखन,भगवत,पिंकू बुधौलिया,अशोक शर्मा,गोविंद पाल,मोहित,अमित कुशवाहा, पंचम,राजीव,छबिराम , ज्ञानसिंह आदि भारी संख्या में लोग मौजूद रहे ।
