संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत आज, ज्योतिषाचार्य ने बताया महत्व, चन्द्रोदय रात्रि 08:35 के वाद अर्घ दान
महर्षि पाराशर ज्योतिष संस्थान ट्रस्ट के ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय जी ने बताया कि माघ कृष्ण चतुर्थ्यां तु प्रादुर्भूतो गणाधिप:।।
यह व्रत माघ कृष्ण पक्ष चतुर्थी को किया जाता है। इस वार संकष्टी गणेश चतुर्थी तिथि के दिन मंगलवार का दिन आश्लेषा नक्षत्र दिवा 03:50 तक पश्चात् मघा नक्षत्र भोग करेगी। प्रीति योग मिल रहा है अतःयह व्रत सर्वमंगलकारी है। इस व्रत को तिलकुटी एवं वक्रतुण्ड चतुर्थी व्रत भी कहते है इस दिन बुद्धि-विद्या वारिधि गणेश तथा चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए। दिन भर व्रत रहने के बाद सायं काल चन्द्र दर्शन होने पर दूध का अर्घ देकर चन्द्रमा की बिधिवत पूजा की जाती है। गौरी -गणेश की स्थापना करके पूजन करके तथा वर्ष भर उन्हें घर में रखा जाता है।
नैवेद्य सामग्री,तिल,ईख,गंजी,अमरूद,गुड तथा घी से चन्दमा एवं गणेश जी को भोग लगाया जाता है। यह नैवेद्य रात्रि भर डलिया या पीले वस्त्र इत्यादि से ढंककर यथावत रख दिया जाता है, जिसे पहार कहते है। मातायें पुत्र तथा पति की सुख समृद्धि के लिए व्रत रहती है। सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उस ढंके हुए पहार को पुत्र ही खोलता है तथा भाई-बन्धुओं में वितरित करना चाहिए, जिससे आपस में प्रेम भावना स्थापित होता है।
