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श्रीमद्भागवत कथा में रासलीला और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुन श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध

गड़वार(बलिया)
कस्बा क्षेत्र के दामोदरपुर गांव में चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का आयोजन हुआ,जिसे धूमधाम से मनाया गया। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध,महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना,कालयवन का वध,उद्धव-गोपी संवाद एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। कथा के दौरान कथा वाचक पं.शीतल प्रकाश ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा जीवात्मा परमात्मा का मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है। कथा व्यास पंडित शीतल प्रकाश ने कहा कि रास का तात्पर्य परमानंद की प्राप्ति है,जिसमें दुःख,शोक आदि से सदैव के लिए निवृत्ति मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों को रास के माध्यम से सदैव के लिए परमानंद की अनुभूति करवाई। कथा वाचक ने कहा कि आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक है। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी है। पं.शीतल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मिणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं के आनंद से परिपूर्ण किया। कथा स्थल पर रूक्मिणी विवाह के आयोजन श्रद्धालुओं को झुमने पर मजबूर कर दिया। कथा के अन्त भव्य आरती का आयोजन किया गया।मुख्य यजमान के रूप में पूर्व प्रधान विजय शंकर पाण्डेय सपत्नीक मौजूद रहे।

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