झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ललित कला संस्थान में व्याख्यान माला श्रृंखला के अंतर्गत एक गरिमामय एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार सरिता तिवारी ने पत्रकारिता के सामाजिक दायित्व विषय पर सारगर्भित उद्बोधन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही तथा प्रश्नोत्तर सत्र में जिज्ञासापूर्ण संवाद ने वातावरण को अकादमिक गंभीरता प्रदान की।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं “जबलपुर की कला धरोहर” शीर्षक से आयोजित चित्रकला एवं छायांकन प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ। यह प्रदर्शनी शैक्षणिक भ्रमण पर आधारित थी, जिसमें विद्यार्थियों ने जबलपुर की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर को अपने सृजनात्मक दृष्टिकोण से कैनवास और फोटोग्राफी के माध्यम से अभिव्यक्त किया। नर्मदा तट, ऐतिहासिक स्मारक, स्थानीय जीवन शैली और स्थापत्य सौंदर्य को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया, जिसकी अतिथियों ने सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता परीक्षा नियंत्रक राजबहादुर ने की। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में उन्होंने व्याख्यान माला और शैक्षणिक भ्रमण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कक्षा-कक्ष के बाहर का अनुभव विद्यार्थियों के बौद्धिक और व्यवहारिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर देता है, जिससे उनके भीतर शोधपरक दृष्टि और विश्लेषणात्मक क्षमता का विकास होता है। उन्होंने कला और पत्रकारिता को समाज का दर्पण बताते हुए कहा कि दोनों ही विधाएँ सत्य और संवेदनशीलता की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं।
मुख्य वक्ता सरिता तिवारी ने अपने उद्बोधन में समकालीन मीडिया परिदृश्य, पत्रकारिता की चुनौतियों और सामाजिक उत्तरदायित्वों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में सूचना का प्रवाह तीव्र है, परंतु सत्य की पुष्टि और नैतिक प्रतिबद्धता का महत्व और भी बढ़ गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व है।
उन्होंने शैक्षणिक भ्रमण की उपयोगिता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पत्रकार और कलाकार दोनों के लिए प्रत्यक्ष अनुभव अत्यंत आवश्यक है। जब विद्यार्थी किसी स्थान की संस्कृति, परंपरा और जनजीवन को स्वयं देखता और समझता है, तभी उसकी अभिव्यक्ति में प्रामाणिकता और गहराई आती है। उन्होंने कहा कि भ्रमण विद्यार्थियों के दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है और उन्हें पुस्तकीय ज्ञान से आगे बढ़कर वास्तविकता से जुड़ने का अवसर देता है।
प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने मीडिया की विश्वसनीयता, सोशल मीडिया की भूमिका, फेक न्यूज की समस्या, करियर संभावनाएँ और क्षेत्रीय पत्रकारिता के भविष्य जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे। सरिता तिवारी ने प्रत्येक प्रश्न का संतुलित एवं तथ्यपूर्ण उत्तर देते हुए कहा कि आज के युवा पत्रकारों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता भी विकसित करनी चाहिए।
मुख्य अतिथि उपकुलसचिव (वित्त एवं गोपनीय) सुनील कुमार सेन ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान माला और शैक्षणिक भ्रमण जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को समग्र शिक्षा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि कला प्रदर्शनी विद्यार्थियों की रचनात्मकता का प्रमाण है और इस प्रकार के आयोजन उन्हें आत्मविश्वास प्रदान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रमण का उद्देश्य केवल स्थल दर्शन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अध्ययन, प्रलेखन और विश्लेषण की प्रक्रिया को समझना है।
अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. पुनीत बिसारिया ने कहा कि ललित कला संस्थान विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने शैक्षणिक भ्रमण को कला शिक्षा का अभिन्न अंग बताते हुए कहा कि जब विद्यार्थी किसी ऐतिहासिक या सांस्कृतिक स्थल का प्रत्यक्ष अवलोकन करता है, तो उसकी रचनात्मक दृष्टि अधिक परिपक्व होती है। उन्होंने अतिथि व्याख्यानों को विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया।
पत्रकारिता विभाग के समन्वयक कौशल त्रिपाठी ने कहा कि व्याख्यान माला का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से संवाद का अवसर प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि अतिथि व्याख्यान विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभवों से अवगत कराते हैं और उनके करियर निर्माण में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. श्वेता पाण्डेय ने बताया कि “जबलपुर की कला धरोहर” प्रदर्शनी शैक्षणिक भ्रमण का प्रतिफल है, जिसमें विद्यार्थियों ने अध्ययन, अवलोकन और सृजन के माध्यम से अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, टीमवर्क और रचनात्मक सोच का विकास करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन गजेंद्र सिंह एवं फैसल उस्मानी ने प्रभावी ढंग से किया। अंत में डॉ. अजय कुमार गुप्ता ने आभार प्रदर्शन करते हुए सभी अतिथियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर संस्थान के शिक्षक डॉ. सुनीता, डॉ. अंकिता शर्मा, डॉ. रानी शर्मा, डॉ. ब्रजेश कुमार, डॉ. संतोष कुमार सहित विद्यार्थी दीपिका राजपूत , रेखा आर्य, आदर्श राजपूत, शुभ शाक्या, धरु प्रताप सिंह, महाश्वेता वर्मा, प्रिया यादव, अनुज यादव, प्रिया यादव, स्वेक्षा आदर्श,सोनू आदि उपस्थित रहे।
समग्र रूप से यह कार्यक्रम व्याख्यान, संवाद और सृजन का सशक्त संगम सिद्ध हुआ, जिसमें पत्रकारिता के सामाजिक दायित्व के साथ-साथ शैक्षणिक भ्रमण की आवश्यकता और उद्देश्य पर भी सार्थक विमर्श हुआ।
