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यमुना मैया की पुकार बनकर उठीं जल सहेलियाँ, मथुरा-वृंदावन हुआ भाव-विभोर

मथुरा/वृंदावन। यमुना मैया की अविरलता और निर्मलता के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने निकली जल सहेलियों की पदयात्रा ने मथुरा–वृंदावन में अपने तीन दिवसीय प्रवास के दौरान जनमानस को भाव-विभोर कर दिया। इस दौरान घाटों, आश्रमों और स्थानीय समुदायों के बीच व्यापक जनसंवाद करते हुए जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और पर्यावरणीय संतुलन के महत्व पर जागरूकता का संदेश दिया गया। यात्रा अब अपने अगले पड़ाव के लिए गौरी गोपाल वृद्धआश्रम ट्रस्ट से आगे प्रस्थान कर चुकी है।

ट्रस्ट के संस्थापक परम पूज्य अनिरुद्ध आचार्य महाराज जी के सान्निध्य में जल सहेलियों के लिए प्रवास एवं भोजन की स्नेहपूर्ण व्यवस्था की गई। इस आत्मीय सहयोग के लिए समिति ने आश्रम परिवार के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। प्रस्थान से पूर्व “बुंदेलखंड के जलपुरुष” के रूप में विख्यात डॉ. संजय सिंह ने अपनी समिति एवं समस्त जल सहेलियों की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि यह यात्रा केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि यमुना मैया की अविरल–निर्मल धारा के लिए जनभागीदारी का जीवंत आंदोलन है।

तीन दिनों तक पावन मथुरा–वृंदावन धरा पर जल सहेलियों ने “यमुना अविरल–निर्मल” के उद्घोष के साथ जनजागरण की अलख जगाई। यमुना तटों पर सामूहिक संवाद, भक्ति गीत, जनसंपर्क अभियान और प्रेरक संदेशों के माध्यम से लोगों को नदी संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। जल सहेलियों ने लोगों से अपील की कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ नदी की स्वच्छता और संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाई जाए।

जब सैकड़ों जल सहेलियाँ एक साथ यमुना तट पर पहुँचीं, तो वातावरण भक्ति, संकल्प और भावनाओं से ओतप्रोत हो उठा। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि अनेक धार्मिक और सामाजिक यात्राएँ देखने के बावजूद, इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का नदी संरक्षण के लिए समर्पित रूप पहली बार देखने को मिला। इस पहल ने समाज में नई आशा और विश्वास जगाया है कि सामूहिक प्रयासों से यमुना को पुनः अविरल और निर्मल स्वरूप में लौटाया जा सकता है।

यात्रा के दौरान जल सहेलियों ने जल संरक्षण, नदी प्रदूषण के दुष्प्रभाव, भूजल संकट और बदलते पर्यावरणीय हालातों पर भी लोगों से चर्चा की तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जल स्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया। जनमानस में यह विश्वास मजबूत हुआ कि यदि समाज, प्रशासन और श्रद्धालु मिलकर जिम्मेदारी निभाएं, तो यमुना पुनर्जीवन का सपना साकार हो सकता है। अब जल सहेलियाँ अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ चुकी हैं—हृदय में अटूट श्रद्धा, आंखों में विश्वास और संकल्प में दृढ़ता लिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, अविरल और जीवनदायिनी यमुना सौंप सकें।

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