Home » Uncategorized » मोंठ में 111 वर्ष पुरानी श्री रामलीला बंद, मंचन शुरू कराने की उठी मांग

मोंठ में 111 वर्ष पुरानी श्री रामलीला बंद, मंचन शुरू कराने की उठी मांग

मोंठ में 111 वर्ष पुरानी श्री रामलीला बंद, मंचन शुरू कराने की उठी मांग

मोंठ : नगर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान बन चुकी 111 वर्ष पुरानी श्री रामलीला विगत छह वर्षों से बंद पड़ी है। परंपराओं और धार्मिक आस्था का प्रतीक रही यह रामलीला न सिर्फ मोंठ बल्कि आसपास के ग्रामीण अंचलों के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी। अब इसके पुनः मंचन की मांग तेज हो गई है। नगर के संभ्रांत नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कई युवा समूहों ने प्रशासन से लेकर रामलीला कमेटी तक से इसकी बहाली की अपील की है।

जानकारी के अनुसार मोंठ में लगभग 18 दिन तक भव्य रूप से आयोजित होने वाली श्री रामलीला का इतिहास बेहद गौरवपूर्ण रहा है। सन 1913 के आसपास आरंभ हुई इस लीलोत्सव को बुजुर्गों और इतिहासकारों ने अपनी यादों में आज भी संजो रखा है। यहां का मंचन पारंपरिक शैली में होता था, जिसमें स्थानीय कलाकारों द्वारा राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान और रावण जैसे चरित्रों का प्रभावशाली अभिनय दर्शकों को भाव-विभोर कर देता था। दशहरा पर्व पर रावण दहन के समय हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती थी और पूरा मैदान श्रद्धा से भर उठता था।

बताया जाता है कि छह वर्ष पूर्व संसाधनों की कमी, प्रबंधन से जुड़े विवादों और आर्थिक सहयोग के अभाव के चलते रामलीला का आयोजन बंद हो गया था। तब से लेकर अब तक कई प्रयास हुए, लेकिन मंचन दोबारा शुरू नहीं हो सका। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रामलीला बंद होने से सांस्कृतिक गतिविधियों में कमी आई है। बच्चों और युवाओं को धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम समाप्त हो गया है। वहीं, बाजार में दशहरे के दौरान आने वाली चहल-पहल और रौनक भी प्रभावित हुई है।

नगर के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि 111 वर्ष पुरानी विरासत को यूं समाप्त होने देना उचित नहीं है। यदि प्रशासनिक सहयोग, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक संसाधन एकत्र हों, तो रामलीला का पुनर्जीवन संभव है। कई युवाओं ने भी मंचन में स्वयंसेवा देने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है, बस उन्हें एक मंच की आवश्यकता है।

उधर, लोगों ने प्रस्ताव रखा है कि नगर पंचायत, स्थानीय जनप्रतिनिधि और रामलीला समिति मिलकर एक संयुक्त बैठक आयोजित करें ताकि आयोजन के लिए ठोस योजना बनाई जा सके। नागरिकों को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह ऐतिहासिक रामलीला फिर से जीवंत होगी और मोंठ की सांस्कृतिक विरासत पुनः चमक उठेगी।

440 Views

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *