मोंठ। उपजिलाधिकारी अवनीश तिवारी ने तहसील सभागार में पराली जलाने पर रोक लगाने के संबंध में तहसील स्तरीय अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में एसडीएम ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण को गंभीर नुकसान होता है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता घटती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम पंचायत स्तर पर किसान जागरूकता अभियान चलाया जाए। गांव-गांव में बैठक कर किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करें तथा वैकल्पिक उपायों की जानकारी दें।
एसडीएम ने चेतावनी दी कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि लेखपाल, पंचायत सचिव और कृषि विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से गांवों में निगरानी करें। प्रत्येक ग्राम में किसानों को पराली प्रबंधन के तरीके जैसे हैप्पी सीडर, रोटावेटर और मल्चर का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाए।
कृषि विभाग को निर्देशित किया गया कि वह किसानों को पराली प्रबंधन यंत्रों के उपयोग का प्रशिक्षण दें और जागरूकता रैली भी निकालें। सभी अधिकारी अपने क्षेत्र में गश्त बढ़ाएं और यदि किसी किसान द्वारा पराली जलाने की सूचना मिले तो तत्काल कार्रवाई करें। बैठक में खंड विकास अधिकारी तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कृषि अधिकारी, राजस्वकर्मी और अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पराली से कम्पोस्ट खाद बनाकर किसान अपनी भूमि की उर्वरता बढ़ा सकते हैं। इस दिशा में सरकार द्वारा अनुदान भी दिया जा रहा है। उन्होंने सभी अधिकारियों से कहा कि किसान हित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से कार्य करें ताकि क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर पूर्ण रूप से रोक लग सके।
