भगवान भक्ति को प्राप्त करने के लिए जा रहे हैं इसलिए जब भी जीवन में भक्ति अध्यात्म की यात्रा करनी हो तो गुरु का सानिध्य में चाहिए–कथा व्यास शांतनु महाराज
मोंठ–कस्बा के श्री शीतल धाम प्रांगण में चल रही श्री रामकथा ने कथा व्यास शांतनु महाराज ने सुंदर कथा का वर्णन किया उन्होंने कहा कि गुरुदेव विश्वामित्र जी के साथ भगवान राम और लक्ष्मण जनकपुर में प्रवेश किए हैं जनकपुर क्या है जनकपुरी विशेष प्रकार का नगर है जिसमें साक्षात भक्ति महारानी बैठी और भगवान भक्ति को प्राप्त करने के लिए जा रहे हैं इसलिए जब भी जीवन में भक्ति अध्यात्म की यात्रा करनी हो तो गुरु का सानिध्य में चाहिए भगवान राम और लक्ष्मण जनकपुर भ्रमण के लिए गुरु की आज्ञा से चले और इनके इस रूप को देखकर पूरे जनकपुर में शोर हो गया भगवान ने सब को दर्शन देकर आनंदित किया पुष्प वाटिका के श्रृंगारिक प्रसंग को सुनाते हुए महाराज जी ने कहा पुष्पवाटिका वह स्थल है जहां पर भगवान और भक्ति का पहली बार मिलन हुआ जिनको भी भगवान का दर्शन करना है उनको बाग में आना ही पड़ेगा और बाग मानस में संतों की सभा को कहा है महाराज जी ने बताया कि भगवान और जानकी जी दोनों की अवस्था किशोरावस्था है और यह अवस्था जीवन की सबसे महत्वपूर्ण और सबसे खतरनाक होता है इसलिए यह अवस्था सुधरे सदी रहे इसके लिए बालकों को गुरु पूजा एवं बालिकाओं को गौरी पूजा करना चाहिए गुरु यानी क्या गुरु यानी शुभ मर्यादा आज्ञाकारीता आदि ऐसे गुणवाचक शब्द जो भी हैं और गौरी अनी गुणों की खान वह पत्थर की प्रतिमा नहीं अपितु गौरी रानी गरिमा महिमा वात्सल्य करूना दया आदि रंगभूमि जब भगवान का प्रवेश हुआ तो सभी राजा अपनी अपनी भावना के अनुसार भगवान का दर्शन करने लगे धनुष यज्ञ के प्रसंग में महाराज जी ने कहा बहुत सारे राजाओं ने धनुष को तोड़ने का प्रयत्न किया लेकिन किसी से नहीं टूटा क्योंकि यह सभी ए राजा मोर थे और भगवान धनुष को क्षण भर में भी तोड़ दिए क्योंकि धनुष अहंकार का प्रतीक होता है और भगवान क्षणभर से कम में तोड़ देते हैं और भगवान के द्वारा धनुष टूटते ही सारे जग में शोर हो गया खुशियां मनाई जाने लगी और मानव धनुष टूटने के साथ ही भगवान का विवाह पूर्ण हो गया लक्ष्मण परशुराम संवाद को भी महाराज जी ने सुनाया अयोध्या से बारात आई और भगवान का सुंदर विवाह महाराज जनक के आंगन में हुआ आज भगवान और भक्ति का मिलन हो गया और सखियों ने मंगल गीत गाकर बधाई दी महाराज जी ने जानकी जी के विदाई के प्रसंग में कहा कि बेटियां ही घर की लक्ष्मी होती है जब बेटी विदा होती है कठोर से कठोर दिल का बाप ही पड़ता है क्यों क्योंकि बाप और बेटी का रिश्ता संसार में सबसे पवित्र है बाप बेटी से ही अपने मन की बात तथा बेटी बाप से ही अपने मन की बात करती है।राम कथा की अध्यक्षता कर रहे महंत वैदेही शरण महाराज अयोध्या धाम बामन मंदिर ने अपने उद्बोधन में सभी श्रद्धालुओं से सत्य के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सत्य ही धर्म का मूल है और इसी से मानव जीवन का कल्याण संभव है। महाराज जी ने बताया कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन सत्य, मर्यादा और कर्तव्य का प्रतीक है। यदि मनुष्य सत्य को अपना ले तो समाज में व्याप्त बुराइयाँ स्वतः समाप्त हो जाएँ। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि अंततः विजय सत्य की ही होती है।
—कथा में पधारे रावतपुरा सरकार महंत रविशंकर महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचनों के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं को जीवन का सच्चा मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन ईश्वर की अनुपम देन है, जिसे धर्म, भक्ति और सत्कर्मों के द्वारा सार्थक बनाया जा सकता है। रावतपुरा सरकार ने श्रीराम के आदर्श चरित्र पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मर्यादा, सत्य और त्याग से ही समाज का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिक युग में व्यक्ति धर्म से दूर होता जा रहा है, जबकि धर्म ही जीवन को संतुलन और शांति प्रदान करता है। कथा के दौरान उन्होंने माता-पिता, गुरु और संतों के सम्मान को सर्वोपरि बताते हुए सेवा भाव अपनाने की प्रेरणा दी। रावतपुरा सरकार ने सभी से आग्रह किया कि आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बनाए रखते हुए प्रभु भक्ति में लीन रहें।इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री भानुप्रताप वर्मा,गरौठा विद्यायक जवाहरलाल राजपूत,शिक्षक विद्यायक डॉ बाबूलाल तिवारी पूर्व जिलाध्यक्ष हेमंत परिहार,मैथली मुदगिल महंत कमलेश महाराज,राजेन्द्र नायक,महेश मुदगिल,कपिल मुदगिल, विकास निरंजन,राजीव द्विवेदी,राजेन्द्र सिंह सेंगर,राजा जौरा,सुरजीत राजपूत,महेंद्र तालोंड,राहुल लोधी,मुकेश राजपूत,लोकेंद्र सिंह गोकुल,रामराजा धनोरा,सौरभ दुबे,अमित महाराज, हरगोविंद कुशवाहा,कृष्णा ठाकुर, आदि अनेक लोग मौजूद रहे।संचालन गोविंद सिसोदिया ने किया।
