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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय और परमार्थ समाजसेवी संस्थान के बीच हुआ एमओयू

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्यिगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित टेक्नोलॉजी इनेबलिंग सेंटर के तत्वाधान में दिनांक 17 से 23 दिसंबर 2025 के मध्य आयोजित किये गए 7 दिवसीय “मिलेट प्रोसेसिंग: टेक्नोलॉजी आधारित फूड इनोवेशन एवं पैकेजिंग” प्रशिक्षण कार्यक्रम आज सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिसका की उद्देश्य मिलेट आधारित खाद्य उत्पादों के नवाचार, मूल्य संवर्धन तथा स्वरोजगार को बढ़ावा देना था, में बिरगुवा, सिमरावरी, ओथोंदना, केशवपुर सहित झांसी व आस-पास के ३५ से अधिक महिला उद्यमियों ने हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण के माध्यम से उन्नत एवं नवाचारी मिलेट उत्पाद विकसित करना सीखा जिनमें मल्टी ग्रेन आटा, मिलेट स्नैक्स, रागी लड्डू, नमकीन मिश्रण, मिलेट समोसा, मिलेट कुकीज़, विभिन्न मिलेट प्रीमिक्स आदि शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान कई मूल्य संवर्धक विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों को फूड सेफ्टी नियमों तथा मिलेट आधारित खाद्य व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।

फूड सेफ्टी से संबंधित विशेषज्ञ व्याख्यान पवन चौधरी (सहायक आयुक्त, FSDA, झांसी) एवं श्री सुमांशु सचान (फूड सेफ्टी ऑफिसर, FSDA, झांसी) द्वारा दिए गए। वहीं डॉ. अनिल कुमार, निदेशक शिक्षा, RLBCAU ने मिलेट प्रोसेसिंग एवं उसके नवाचारी उत्पादों पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया।
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने कहा की भारत सरकार द्वारा मिलेट्स को ‘श्री-अन्न’ का दर्जा दिया जाना और अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष–2023 का नेतृत्व करना, इस बात का प्रमाण है कि देश भविष्य की कृषि और खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर है। आज मिलेट्स केवल एक फसल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, पोषण अभियान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनते जा रहे हैं। परन्तु केवल उत्पादन से ही किसान या ग्रामीण परिवार समृद्ध नहीं हो सकता। वास्तविक परिवर्तन तब आता है जब खेती के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, गुणवत्ता नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा और विपणन जुड़ते हैं। इसी आवश्यकता को समझते हुए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की परिकल्पना की गई, जिसमें मिलेट आधारित खाद्य एवं बेकरी उत्पादों के व्यावहारिक निर्माण पर विशेष बल दिया गया।

कार्यक्रम संयोजक डॉ. नूपुर गौतम ने प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन आयोजित गतिविधियों एवं उनके परिणामों का विवरण प्रस्तुत किया, जबकि टेक्नोलॉजी इनेबलिंग सेंटर के समन्वयक डॉ. लवकुश द्विवेदी ने डीएसटी-टेक के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। समापन समारोह के दौरान सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए तथा एक मिलेट वर्किंग किट भी वितरित की गई, जिसमें मिलेट अनाज के नमूने, पोषक तत्व संरचना (न्यूट्रिएंट कंपोजीशन), मिलेट उत्पादों की रेसिपी बुक एवं मिलेट के स्वास्थ्य लाभ दर्शाने वाली सूचना पत्रिकाएँ शामिल थीं।

कार्यक्रम में डॉ. अनिल कुमार एवं ज्ञानेंद्र कुमार, कुलसचिव, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त प्रो. काव्य दुबे, डॉ. प्रतिभा आर्या, डॉ. ममता सिंह, एकता अग्रवाल एवं पूजा देवी की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में परमार्थ समाज सेवी संस्थान की ओर से शिवानी सिंह एवं संगीता श्रीवास्तव प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एवं परमार्थ समाज सेवी संस्थान के मध्य भविष्य में संयुक्त सहयोग हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए, जिससे आगामी प्रशिक्षण, नवाचार एवं ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में DST-BUTEC के स्टाफ सदस्यों डॉ. निष्ठा व्यास, डॉ. श्रीकांत, सतीश एवं रोहित की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान सभी गतिविधियों का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया।

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