नमामि गंगे योजना में लापरवाही से ग्रामीण बेहाल, सड़कें टूटीं – पानी की टंकी बनी सफेद हाथी
पूंछ केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना के तहत गांवों में शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सपना कागजों तक ही सीमित रह गया है। मोठ विकासखंड के पूंछ क्षेत्र के कई गांवों में इस योजना के कामों ने विकास की जगह मुसीबत खड़ी कर दी है। पाइपलाइन डालने के दौरान सड़कों को इस कदर खोदा गया कि अब हालात बदतर हैं। बरसात में सड़कें दलदल बन चुकी हैं, और ग्रामीणों का निकलना दूभर हो गया है।
खुदाई से टूटी सड़कें, जगह-जगह गहरे गड्ढे
योजना के कार्यों के दौरान सड़कों पर बिना मरम्मत के छोड़ी गई खुदाई अब गांववासियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। जगह-जगह गहरे गड्ढे और कीचड़ ने आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया है। बरसात के मौसम में यह गड्ढे पानी से भर जाते हैं, जिससे लोग गिरकर घायल भी हो रहे हैं।
स्थानीय निवासी सुरेश कुमार बताते हैं, “पाइपलाइन तो डाल दी, लेकिन सड़कें उखाड़ने के बाद किसी ने दोबारा बनाने की सुध नहीं ली। अब गांव से निकलना बहुत मुश्किल हो गया है।”
–पानी की टंकी बनी शोपीस, अब तक नहीं मिली सप्लाई
गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई पानी की टंकी सफेद हाथी साबित हो रही है। वर्षों बीत गए, लेकिन आज तक उससे एक बूंद भी पानी नहीं मिला। पाइपलाइनें जगह-जगह टूटी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी और ठेकेदारों ने कागजी कार्रवाई पूरी मान ली, पर काम अधूरा छोड़ दिया।
रामकृष्ण पाल, एक अन्य ग्रामीण, कहते हैं—“टंकी तो दिख रही है, लेकिन पानी नहीं। अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचवाकर चले जाते हैं, पर समस्या जस की तस है।”
बरसात में बढ़ी मुसीबत, आवागमन ठप
बरसात के कारण गलियों में कीचड़ और पानी भर जाने से वाहन फंस जाते हैं। कई बार एम्बुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती। बच्चों को स्कूल जाने में दिक्कत है और बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने में घंटों लग जाते हैं। ग्रामीण बताते हैं कि कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
—प्रशासन पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने दी चेतावनी
ग्राम प्रधान और विभागीय अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ा जा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने साफ कहा है कि अगर जल्द सड़कें दुरुस्त नहीं की गईं और पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
ग्रामीण राजेश अहिरवार ने कहा, “हमने विकास की उम्मीद की थी, लेकिन अब तो जीना मुश्किल हो गया है। सड़कें टूटी हैं और पानी की समस्या जस की तस।”
—जनता की उम्मीदें टूटीं, योजना बनी परेशानी का सबब
नमामि गंगे योजना, जो स्वच्छता और पेयजल की दिशा में बड़ी पहल मानी जा रही थी, ग्रामीण इलाकों में लापरवाही की भेंट चढ़ती दिख रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद न सड़कों की मरम्मत हुई, न शुद्ध जल की व्यवस्था। ग्रामीणों की जुबान पर अब सिर्फ एक ही सवाल है — “कब मिलेगा साफ पानी और चलने लायक सडकें।
विकास अग्रवाल पूंछ
