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नागपुर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में डॉ नईम ने की तकनीकी सत्र की अध्यक्षता

झाँसी. राष्ट्रसंत तुकाडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय नागपुर के समाजशास्त्र विभाग, जे एम पटेल कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस भंडारा, अठावले कॉलेज ऑफ़ सोशल वर्क भंडारा (महाराष्ट्र) के संयुक्त तत्वावधान में “मानविकी एवं भारतीय ज्ञान परंपरा” विषयक आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के सहायक आचार्य डॉ. मुहम्मद नईम ने भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज कार्य में भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल तत्व समाहित हैं । भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित सेवा, करुणा, सहअस्तित्व, लोककल्याण एवं समावेशिता जैसे मूल्य आधुनिक समाज कार्य की बुनियाद हैं। उन्होंने वैदिक, बौद्ध, जैन, इस्लाम और भक्ति परंपरा के संदर्भों के माध्यम से समाज कार्य की अवधारणाओं को समकालीन सामाजिक समस्याओं से जोड़ा तथा भारतीय संदर्भ में स्वदेशी समाज कार्य मॉडल की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भारत में दान और जकात की जो परोपकार की भावना आधारित परंपरा प्रारंभ हुई थी, वह आज व्यावसायिक समाज कार्य में परिवर्तित हो गई है, जिसका भारतीय समाज के संदर्भों में प्रयोग किया जाना आवश्यक है ।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने विषय से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर देते हुए डॉ मुहम्मद नईम ने भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवहारिक समाज कार्य हस्तक्षेप के अनुरूप अपनाने की संभावनाओं को रेखांकित किया।
इस अवसर पर अधिष्ठाता मानविकी डॉ श्यामराव कोरेटी, प्रो केशव बालके, डॉ नरेश कोलते, डॉ शैलेन्द्र लेंदे, डॉ प्रदीप मेश्राम, डॉ अशोक टी बोरकर, डॉ चंद्र शेखर मालवीय, डॉ धनंजय सोंटकके, डॉ नितिन के, डॉ सदफ़, डॉ मो रिज़वान, डॉ वनिता तुमरे, डॉ देव कुमार अहिरे, डॉ प्रभाकर, डॉ अमोल सिंह रोटेले, डॉ नंद किशोर एस भगत सहित विभिन्न राज्यों के शिक्षक, शोधार्थी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे ।

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