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दतिया (भांडेर): हमें भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़कर अपनी पहचान बनानी चाहिए – उदैनियाँ

हमें भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़कर अपनी पहचान बनानी चाहिए – उदैनियाँ
सरस्वती शिशु विद्या मन्दिर में ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन।


भाण्डेर। सरस्वती शिशु विद्या मन्दिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामगढ़ रोड भाण्डेर में ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिसर मातृशक्ति के उत्साह और सांस्कृतिक ऊर्जा से सराबोर रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ विधिवत रूप से किया गया। सरस्वती वंदना के मधुर स्वरों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में कल्पना उदैनियाँ (रिटा. व्याख्याता, स.शि.मं विद्यालय भरतगढ़, दतिया) उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि के रूप में मानसी मडोतिया, सप्तशक्ति संगम की जिला सह संयोजिका ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में भावना परिहार, उपाध्यक्ष, स्वामी विवेकानंद शिक्षा समिति भाण्डेर, मंचासीन रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुनीता श्रीवास्तव व्याख्याता, स.शि.मं विद्यालय भरतगढ़, दतिया ने की | अतिथियों का परिचय ममता शर्मा द्वारा कराया गया तथा उनका स्वागत विद्यालय परिवार की ओर से मनीषा अग्रवाल, अलका समाधिया एवं राजेश्वरी प्रजापति ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर किया। कार्यक्रम का संचालन अविता सेंगर ने अत्यंत कुशलता के साथ किया एवं अंत में आभार प्रदर्शन ममता शर्मा द्वारा व्यक्त किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने पंच परिवर्तन के अंर्तगत कुटुम्ब प्रबोधन, पर्यावरण पर प्रस्तुतियों से सबका मन मोह लिया। विद्यालय परिसर में मातृशक्ति के उत्साह और संगठन की भावना स्पष्ट झलक रही थी। मुख्य वक्ता कल्पना उदैनियाँ ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि – सप्तशक्ति संगम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नारीशक्ति के संगठन और सशक्तिकरण का प्रतीक है। जब समाज की प्रत्येक बहन अपने अंदर की शक्ति को पहचानती है, तभी परिवार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है। हमें भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़कर अपनी पहचान बनानी चाहिए।” उन्होंने विद्यालय परिवार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। मुख्य अतिथि मानसी मडोतिया ने कहा कि – ““महिला शक्ति ही समाज की वास्तविक आधारशिला है। जब महिलाएँ शिक्षित, संगठित और आत्मनिर्भर होती हैं, तभी राष्ट्र प्रगति के मार्ग पर अग्रसर होता है। हमें अपने संस्कारों को बनाए रखते हुए आधुनिकता को आत्मसात करना चाहिए। माँ सरस्वती की कृपा से ही ज्ञान और विवेक का प्रकाश फैलता है।” उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास और शिक्षा के बल पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। विशिष्ट अतिथि भावना परिहार ने अपने संबोधन में कहा – “स्वामी विवेकानंद शिक्षा समिति द्वारा संचालित विद्यालयों में शिक्षा के साथ संस्कारों का जो समन्वय हो रहा है, वही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। बेटियाँ आज हर क्षेत्र में आगे हैं और ऐसे कार्यक्रम उन्हें आत्मबल प्रदान करते हैं।” कार्यक्रम में विद्यालय परिवार की शिक्षिकाओं एवं अभिभावक मातृशक्ति की उत्साही उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्ष सुनीता श्रीवास्तव ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा — “सप्तशक्ति संगम जैसे आयोजन केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि यह नारी के आत्मबोध और सामाजिक चेतना का उत्सव है। जब नारी अपने अंदर की सातों शक्तियों को पहचान लेती है, तब वह समाज और राष्ट्र दोनों को नई दिशा दे सकती है। शिक्षा ही वह माध्यम है जो स्त्री को आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और जागरूक बनाती है। हमें अपनी बेटियों को ऐसे संस्कार देने होंगे कि वे संस्कृति और आधुनिकता दोनों के संतुलन के साथ आगे बढ़ें।” सभी ने एक स्वर में यह संकल्प लिया कि मातृशक्ति को समाज के हर क्षेत्र में सम्मान और नेतृत्व का अवसर दिया जाएगा। अंत में संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सरस्वती शिशु विद्या मन्दिर परिवार ने ‘सप्तशक्ति संगम’ के माध्यम से समाज में महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया।

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