झांसी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-रक्षा और गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि गो-सेवा भारतीय सांस्कृतिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है और इस क्षेत्र में कार्य करने वालों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाना चाहिए।
गोसेवा आयोग की बैठक में गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए प्रत्येक गोशाला में ‘भूसा बैंक’ स्थापित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही स्थानीय किसानों से समन्वय बनाकर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने पर जोर दिया गया।
सीसीटीवी निगरानी और फील्ड निरीक्षण पर जोर
सभी गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सीएसआर फंड के उपयोग की संभावनाओं पर भी बल दिया गया। अधिकारियों और गोसेवा आयोग के पदाधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। पदाधिकारियों को 2-2 के समूह में मंडलवार भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
गो-संरक्षण को बताया ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार
बैठक में कहा गया कि गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती और सतत विकास का महत्वपूर्ण आधार है। पारदर्शिता, तकनीक और जनसहभागिता को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। डीबीटी के माध्यम से समयबद्ध भुगतान और प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर गोवंश की दैनिक संख्या दर्ज करने के निर्देश भी दिए गए।
प्रदेश में 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित
प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनमें 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख, 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख, 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 तथा 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश शामिल हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख लाभार्थियों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं।
गोचर भूमि और चारा विकास पर फोकस
राज्य में 61,118 हेक्टेयर से अधिक गोचर भूमि उपलब्ध है, जिसमें से 10,641.99 हेक्टेयर को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ा गया है और 7,364.03 हेक्टेयर में हरे चारे का विकास किया जा चुका है।
स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता के मॉडल
प्रदेश में 97 गोबर गैस संयंत्र संचालित हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और आय का स्रोत बन रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों और एनजीओ द्वारा गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट और गो-दीप जैसे उत्पादों का निर्माण भी आत्मनिर्भरता का सफल मॉडल बन रहा है।
पशु स्वास्थ्य और टीकाकरण अभियान जारी
पशुओं के स्वास्थ्य के लिए खुरपका-मुंहपका, गलाघोटू और लंपी स्किन डिजीज जैसी बीमारियों के खिलाफ व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। पशुपालकों को निरंतर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
बैठक में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता सहित सदस्य और विभाग के आला अधिकारी मौजूद रहे
